ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः

लोकप्रिय टूल

सभी 119 टूल देखें

नक्षत्र 15 · 27 में से 15

स्वाति नक्षत्र (Swati Nakshatra)

स्वाति (Swati) 27 नक्षत्रों में 15वाँ नक्षत्र है, जो निरयन राशिचक्र में 186°40' से 200°00' तक फैला है। इसका स्वामी राहु है, इसके देवता वायु, पवन देवता हैं और इसका प्रतीक हवा में झुकता कोमल अंकुर है। स्वाति नक्षत्र पूरी तरह तुला राशि (Libra) में है, इसलिए स्वाति में स्थित हर चंद्रमा तुला राशि का चंद्रमा होता है। परंपरा के अनुसार जिन बच्चों के जन्म के समय चंद्रमा यहाँ होता है, उनका नाम रू, रे, रो, ता अक्षरों से रखा जाता है।

  • स्वामी राहु
  • गण देव
  • राशि तुला
15 / 27 स्वाति Swati · 186°40' – 200°00'
“स्वतंत्र स्वभाव वाला”
मुख्य तथ्य

स्वाति नक्षत्र एक नज़र में

स्वामी ग्रह
राहुराहु की दशा से आरंभ
देवता
वायुपवन देवता
प्रतीक
हवा में झुकता कोमल अंकुर
राशि
तुलाLibra
गण
देवस्वभाव
नाड़ी
अंत्यकफ
योनि (पशु)
महिष
अंश
186°40' – 200°00'27 में से नक्षत्र 15
नाम के अक्षर
  • रू
  • रे
  • रो
  • ता
बच्चे के नाम के अक्षर

स्वाति नक्षत्र का अर्थ

स्वाति वह पौधा है जो टूटता नहीं, झुक जाता है: स्वतंत्रता, गति और व्यापार का नक्षत्र। वायु इसके देवता हैं और राहु इसका स्वामी। इसे आत्मनिर्भर और ढल जाने वाला पढ़ा जाता है, जो अपनी गति रोकने वाली किसी भी चीज़ का विरोध करता है।

जिनका चंद्रमा स्वाति में है

परंपरा स्वाति का सार “स्वतंत्र स्वभाव वाला” के रूप में बताती है। जिसका चंद्रमा यहाँ होता है, उसका जीवन राहु की महादशा से शुरू होता है, और इस नक्षत्र का गण देव है, जिसे इस रूप में पढ़ा जाता है: सौम्य और उदार स्वभाव, जिसे शास्त्र दैवी कहते हैं। इसका प्रतीक, हवा में झुकता कोमल अंकुर, और इसके देवता, वायु, पवन देवता, वे छवियाँ हैं जिनसे शास्त्र इसका वर्णन करते हैं। इन्हें किसी व्यक्ति का चित्र नहीं, नक्षत्र का स्वभाव मानें: बाकी कुंडली, चंद्रमा का बल और चल रही दशा तय करते हैं कि यह स्वभाव कैसे प्रकट होता है।

स्वाति के चार चरण और नाम के अक्षर

हर नक्षत्र 3°20' के चार चरणों (पाद) में बँटा होता है। जन्म जिस चरण में पड़ता है, उससे नवांश (Navamsa) तय होता है और नामकरण की परंपरा में बच्चे के नाम का पहला अक्षर भी। स्वाति के लिए ये अक्षर हैं रू, रे, रो, ता।

  • चरण 1 रू
    अंश
    186°40' – 190°00'
    राशि
    तुला
    नवांश
    धनु
  • चरण 2 रे
    अंश
    190°00' – 193°20'
    राशि
    तुला
    नवांश
    मकर
  • चरण 3 रो
    अंश
    193°20' – 196°40'
    राशि
    तुला
    नवांश
    कुंभ
  • चरण 4 ता
    अंश
    196°40' – 200°00'
    राशि
    तुला
    नवांश
    मीन

नक्षत्र से नाम के अक्षर वाला कैलकुलेटर चुने हुए चरण का अक्षर बताता है, और नाम से राशि वाला कैलकुलेटर उल्टी दिशा में काम करता है, नाम से उसकी राशि तक।

मिलान में स्वाति का उपयोग

गुण मिलान (Guna Milan) इस नक्षत्र के तीन वर्गीकरण सीधे पढ़ता है। इसका गण देव है, जिसे स्वभाव के लिए साथी के गण से मिलाया जाता है। इसकी नाड़ी अंत्य (कफ) है: जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें सबसे बड़े कूट पर शून्य अंक मिलता है, जो 36 में से 8 अंक का है। इसकी योनि का पशु महिष है, जिसे सहज अनुकूलता के लिए मिलाया जाता है। दक्षिण भारतीय नक्षत्र पोरुथम दोनों जन्म नक्षत्रों को अपनी दस कसौटियों पर पढ़ता है, और कुंडली मिलान पूरा 36 अंकों का मिलान देता है।

क्या स्वाति मेरा नक्षत्र है?

तभी, जब आपके जन्म के समय चंद्रमा स्वाति में था। चंद्रमा एक नक्षत्र को लगभग एक दिन में पार करता है, इसलिए जन्म तिथि से अधिक से अधिक दो नक्षत्रों तक बात सिमटती है और जन्म समय से निर्णय होता है। स्वाति नक्षत्र पूरी तरह तुला राशि (Libra) में है, इसलिए स्वाति में स्थित हर चंद्रमा तुला राशि का चंद्रमा होता है। अपना जन्म नक्षत्र जानें, अपनी चंद्र राशि देखें, या पूरी कुंडली बनाएँ।

सामान्य प्रश्न

स्वाति नक्षत्र: प्रश्न और उत्तर

स्वाति के बारे में छोटे उत्तर: इसका स्वामी, राशि, नाम के अक्षर, प्रतीक और गण।

आपके अपने जन्म नक्षत्र के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान चाहिए।

मेरा नक्षत्र जानें
स्वाति नक्षत्र का स्वामी कौन है?

स्वाति नक्षत्र का स्वामी राहु है। नक्षत्र का स्वामी तय करता है कि व्यक्ति किस विंशोत्तरी महादशा में जन्म लेता है, इसलिए जिसका चंद्रमा स्वाति में है, उसका जीवन राहु की महादशा से शुरू होता है। चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे तय होता है कि उस पहली दशा का कितना भाग बाकी है।

स्वाति नक्षत्र किस राशि में है?

स्वाति नक्षत्र पूरी तरह तुला राशि (Libra) में है, इसलिए स्वाति में स्थित हर चंद्रमा तुला राशि का चंद्रमा होता है। एक नक्षत्र 13°20' का होता है और एक राशि 30° की, इसलिए अधिकतर नक्षत्र राशि की सीमा पार करते हैं और चरण से तय होता है कि कौन सी चंद्र राशि लागू होती है। चरण जन्म समय से तय होता है, इसीलिए एक ही नक्षत्र वाले दो लोगों की राशियाँ अलग हो सकती हैं।

स्वाति नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?

स्वाति नक्षत्र के नाम अक्षर रू, रे, रो और ता हैं, क्रम से हर चरण का एक। पारंपरिक नामकरण में बच्चे को ऐसा नाम दिया जाता है जो जन्म के समय चंद्रमा वाले चरण के अक्षर से शुरू हो, इसलिए नक्षत्र के साथ चरण भी जानना ज़रूरी है।

स्वाति नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?

स्वाति नक्षत्र का प्रतीक हवा में झुकता कोमल अंकुर है और इसके अधिष्ठाता देवता वायु, पवन देवता हैं। परंपरा इस नक्षत्र का सार "स्वतंत्र स्वभाव वाला" के रूप में बताती है, और प्रतीक और देवता ही इसके स्वभाव को पढ़ने का आरंभ बिंदु हैं। इसकी योनि का पशु, महिष, एक अलग वर्गीकरण है जिसका उपयोग विवाह मिलान में होता है।

स्वाति नक्षत्र का गण और नाड़ी क्या है?

स्वाति का गण देव है और नाड़ी अंत्य (कफ), और इसकी योनि का पशु महिष है। तीनों का उपयोग गुण मिलान में होता है, जो विवाह का 36 अंकों का मिलान है। नाड़ी का भार सबसे अधिक है, 8 अंक, और जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें इस पर शून्य अंक मिलता है; गण 6 अंक का होता है और योनि 4 का।

मुफ़्त खाता

अपने परिवार की कुंडलियाँ एक जगह सहेजें

हर जन्म विवरण एक बार सहेजें। फिर हर कैलकुलेटर आपके, आपके माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों के लिए पहले से गणना करके खुलता है।

  • पूरे परिवार के जन्म विवरण सहेजें
  • हर टूल पहले से गणना करके खुलता है
  • मुफ़्त, और भुगतान की कोई जानकारी नहीं चाहिए

नवग्रह · नौ ग्रह

आपकी रिपोर्ट तैयार हो रही है

आपके विवरण के लिए एक पल। एक नई दृष्टि आपकी प्रतीक्षा में है।