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नक्षत्र 19 · 27 में से 19

मूल नक्षत्र (Mula Nakshatra)

मूल (Mula) 27 नक्षत्रों में 19वाँ नक्षत्र है, जो निरयन राशिचक्र में 240°00' से 253°20' तक फैला है। इसका स्वामी केतु है, इसके देवता निर्ऋति, विलय की देवी हैं और इसका प्रतीक जड़ों का बँधा गुच्छा है। मूल नक्षत्र पूरी तरह धनु राशि (Sagittarius) में है, इसलिए मूल में स्थित हर चंद्रमा धनु राशि का चंद्रमा होता है। परंपरा के अनुसार जिन बच्चों के जन्म के समय चंद्रमा यहाँ होता है, उनका नाम ये, यो, भा, भी अक्षरों से रखा जाता है।

  • स्वामी केतु
  • गण राक्षस
  • राशि धनु
19 / 27 मूल Mula · 240°00' – 253°20'
“जो जड़ तक जाता है”
मुख्य तथ्य

मूल नक्षत्र एक नज़र में

स्वामी ग्रह
केतुकेतु की दशा से आरंभ
देवता
निर्ऋतिविलय की देवी
प्रतीक
जड़ों का बँधा गुच्छा
राशि
धनुSagittarius
गण
राक्षसस्वभाव
नाड़ी
आदिवात
योनि (पशु)
श्वान
अंश
240°00' – 253°20'27 में से नक्षत्र 19
नाम के अक्षर
  • ये
  • यो
  • भा
  • भी
बच्चे के नाम के अक्षर

मूल नक्षत्र का अर्थ

मूल का अर्थ है 'जड़'। इसकी देवी निर्ऋति हैं, विलय की देवी, और केतु इसका स्वामी है। यह उस खोज का नक्षत्र है जो सतह पर नहीं रुकती: शोध, दर्शन, और किसी चीज़ को पूरा उखाड़कर यह देखने की तत्परता कि वह किससे उगी।

जिनका चंद्रमा मूल में है

परंपरा मूल का सार “जो जड़ तक जाता है” के रूप में बताती है। जिसका चंद्रमा यहाँ होता है, उसका जीवन केतु की महादशा से शुरू होता है, और इस नक्षत्र का गण राक्षस है, जिसे इस रूप में पढ़ा जाता है: उग्र और स्वतंत्र स्वभाव, जो आसानी से नहीं झुकता। इसका प्रतीक, जड़ों का बँधा गुच्छा, और इसके देवता, निर्ऋति, विलय की देवी, वे छवियाँ हैं जिनसे शास्त्र इसका वर्णन करते हैं। इन्हें किसी व्यक्ति का चित्र नहीं, नक्षत्र का स्वभाव मानें: बाकी कुंडली, चंद्रमा का बल और चल रही दशा तय करते हैं कि यह स्वभाव कैसे प्रकट होता है।

मूल के चार चरण और नाम के अक्षर

हर नक्षत्र 3°20' के चार चरणों (पाद) में बँटा होता है। जन्म जिस चरण में पड़ता है, उससे नवांश (Navamsa) तय होता है और नामकरण की परंपरा में बच्चे के नाम का पहला अक्षर भी। मूल के लिए ये अक्षर हैं ये, यो, भा, भी।

  • चरण 1 ये
    अंश
    240°00' – 243°20'
    राशि
    धनु
    नवांश
    मेष
  • चरण 2 यो
    अंश
    243°20' – 246°40'
    राशि
    धनु
    नवांश
    वृषभ
  • चरण 3 भा
    अंश
    246°40' – 250°00'
    राशि
    धनु
    नवांश
    मिथुन
  • चरण 4 भी
    अंश
    250°00' – 253°20'
    राशि
    धनु
    नवांश
    कर्क

नक्षत्र से नाम के अक्षर वाला कैलकुलेटर चुने हुए चरण का अक्षर बताता है, और नाम से राशि वाला कैलकुलेटर उल्टी दिशा में काम करता है, नाम से उसकी राशि तक।

मिलान में मूल का उपयोग

गुण मिलान (Guna Milan) इस नक्षत्र के तीन वर्गीकरण सीधे पढ़ता है। इसका गण राक्षस है, जिसे स्वभाव के लिए साथी के गण से मिलाया जाता है। इसकी नाड़ी आदि (वात) है: जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें सबसे बड़े कूट पर शून्य अंक मिलता है, जो 36 में से 8 अंक का है। इसकी योनि का पशु श्वान है, जिसे सहज अनुकूलता के लिए मिलाया जाता है। दक्षिण भारतीय नक्षत्र पोरुथम दोनों जन्म नक्षत्रों को अपनी दस कसौटियों पर पढ़ता है, और कुंडली मिलान पूरा 36 अंकों का मिलान देता है।

क्या मूल मेरा नक्षत्र है?

तभी, जब आपके जन्म के समय चंद्रमा मूल में था। चंद्रमा एक नक्षत्र को लगभग एक दिन में पार करता है, इसलिए जन्म तिथि से अधिक से अधिक दो नक्षत्रों तक बात सिमटती है और जन्म समय से निर्णय होता है। मूल नक्षत्र पूरी तरह धनु राशि (Sagittarius) में है, इसलिए मूल में स्थित हर चंद्रमा धनु राशि का चंद्रमा होता है। अपना जन्म नक्षत्र जानें, अपनी चंद्र राशि देखें, या पूरी कुंडली बनाएँ।

सामान्य प्रश्न

मूल नक्षत्र: प्रश्न और उत्तर

मूल के बारे में छोटे उत्तर: इसका स्वामी, राशि, नाम के अक्षर, प्रतीक और गण।

आपके अपने जन्म नक्षत्र के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान चाहिए।

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मूल नक्षत्र का स्वामी कौन है?

मूल नक्षत्र का स्वामी केतु है। नक्षत्र का स्वामी तय करता है कि व्यक्ति किस विंशोत्तरी महादशा में जन्म लेता है, इसलिए जिसका चंद्रमा मूल में है, उसका जीवन केतु की महादशा से शुरू होता है। चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे तय होता है कि उस पहली दशा का कितना भाग बाकी है।

मूल नक्षत्र किस राशि में है?

मूल नक्षत्र पूरी तरह धनु राशि (Sagittarius) में है, इसलिए मूल में स्थित हर चंद्रमा धनु राशि का चंद्रमा होता है। एक नक्षत्र 13°20' का होता है और एक राशि 30° की, इसलिए अधिकतर नक्षत्र राशि की सीमा पार करते हैं और चरण से तय होता है कि कौन सी चंद्र राशि लागू होती है। चरण जन्म समय से तय होता है, इसीलिए एक ही नक्षत्र वाले दो लोगों की राशियाँ अलग हो सकती हैं।

मूल नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?

मूल नक्षत्र के नाम अक्षर ये, यो, भा और भी हैं, क्रम से हर चरण का एक। पारंपरिक नामकरण में बच्चे को ऐसा नाम दिया जाता है जो जन्म के समय चंद्रमा वाले चरण के अक्षर से शुरू हो, इसलिए नक्षत्र के साथ चरण भी जानना ज़रूरी है।

मूल नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?

मूल नक्षत्र का प्रतीक जड़ों का बँधा गुच्छा है और इसके अधिष्ठाता देवता निर्ऋति, विलय की देवी हैं। परंपरा इस नक्षत्र का सार "जो जड़ तक जाता है" के रूप में बताती है, और प्रतीक और देवता ही इसके स्वभाव को पढ़ने का आरंभ बिंदु हैं। इसकी योनि का पशु, श्वान, एक अलग वर्गीकरण है जिसका उपयोग विवाह मिलान में होता है।

मूल नक्षत्र का गण और नाड़ी क्या है?

मूल का गण राक्षस है और नाड़ी आदि (वात), और इसकी योनि का पशु श्वान है। तीनों का उपयोग गुण मिलान में होता है, जो विवाह का 36 अंकों का मिलान है। नाड़ी का भार सबसे अधिक है, 8 अंक, और जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें इस पर शून्य अंक मिलता है; गण 6 अंक का होता है और योनि 4 का।

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