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नक्षत्र 8 · 27 में से 8

पुष्य नक्षत्र (Pushya Nakshatra)

पुष्य (Pushya) 27 नक्षत्रों में आठवाँ नक्षत्र है, जो निरयन राशिचक्र में 93°20' से 106°40' तक फैला है। इसका स्वामी शनि है, इसके देवता बृहस्पति, देवगुरु हैं और इसका प्रतीक गाय का थन; कमल है। पुष्य नक्षत्र पूरी तरह कर्क राशि (Cancer) में है, इसलिए पुष्य में स्थित हर चंद्रमा कर्क राशि का चंद्रमा होता है। परंपरा के अनुसार जिन बच्चों के जन्म के समय चंद्रमा यहाँ होता है, उनका नाम हू, हे, हो, डा अक्षरों से रखा जाता है।

  • स्वामी शनि
  • गण देव
  • राशि कर्क
08 / 27 पुष्य Pushya · 93°20' – 106°40'
“सत्ताईस नक्षत्रों में सबसे शुभ”
मुख्य तथ्य

पुष्य नक्षत्र एक नज़र में

स्वामी ग्रह
शनिशनि की दशा से आरंभ
देवता
बृहस्पतिदेवगुरु
प्रतीक
गाय का थन; कमल
राशि
कर्कCancer
गण
देवस्वभाव
नाड़ी
मध्यपित्त
योनि (पशु)
मेष
अंश
93°20' – 106°40'27 में से नक्षत्र 8
नाम के अक्षर
  • हू
  • हे
  • हो
  • डा
बच्चे के नाम के अक्षर

पुष्य नक्षत्र का अर्थ

कई ग्रंथ पुष्य को सबसे शुभ नक्षत्र मानते हैं, जिसमें विवाह को छोड़ लगभग हर काम सफल होता है। बृहस्पति इसके देवता हैं और शनि इसका स्वामी, विस्तार और अनुशासन की एक असामान्य जोड़ी। यह पोषण का और उस देखभाल का संकेत है जो माँगी नहीं, दी जाती है।

जिनका चंद्रमा पुष्य में है

परंपरा पुष्य का सार “सत्ताईस नक्षत्रों में सबसे शुभ” के रूप में बताती है। जिसका चंद्रमा यहाँ होता है, उसका जीवन शनि की महादशा से शुरू होता है, और इस नक्षत्र का गण देव है, जिसे इस रूप में पढ़ा जाता है: सौम्य और उदार स्वभाव, जिसे शास्त्र दैवी कहते हैं। इसका प्रतीक, गाय का थन; कमल, और इसके देवता, बृहस्पति, देवगुरु, वे छवियाँ हैं जिनसे शास्त्र इसका वर्णन करते हैं। इन्हें किसी व्यक्ति का चित्र नहीं, नक्षत्र का स्वभाव मानें: बाकी कुंडली, चंद्रमा का बल और चल रही दशा तय करते हैं कि यह स्वभाव कैसे प्रकट होता है।

पुष्य के चार चरण और नाम के अक्षर

हर नक्षत्र 3°20' के चार चरणों (पाद) में बँटा होता है। जन्म जिस चरण में पड़ता है, उससे नवांश (Navamsa) तय होता है और नामकरण की परंपरा में बच्चे के नाम का पहला अक्षर भी। पुष्य के लिए ये अक्षर हैं हू, हे, हो, डा।

  • चरण 1 हू
    अंश
    93°20' – 96°40'
    राशि
    कर्क
    नवांश
    सिंह
  • चरण 2 हे
    अंश
    96°40' – 100°00'
    राशि
    कर्क
    नवांश
    कन्या
  • चरण 3 हो
    अंश
    100°00' – 103°20'
    राशि
    कर्क
    नवांश
    तुला
  • चरण 4 डा
    अंश
    103°20' – 106°40'
    राशि
    कर्क
    नवांश
    वृश्चिक

नक्षत्र से नाम के अक्षर वाला कैलकुलेटर चुने हुए चरण का अक्षर बताता है, और नाम से राशि वाला कैलकुलेटर उल्टी दिशा में काम करता है, नाम से उसकी राशि तक।

मिलान में पुष्य का उपयोग

गुण मिलान (Guna Milan) इस नक्षत्र के तीन वर्गीकरण सीधे पढ़ता है। इसका गण देव है, जिसे स्वभाव के लिए साथी के गण से मिलाया जाता है। इसकी नाड़ी मध्य (पित्त) है: जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें सबसे बड़े कूट पर शून्य अंक मिलता है, जो 36 में से 8 अंक का है। इसकी योनि का पशु मेष है, जिसे सहज अनुकूलता के लिए मिलाया जाता है। दक्षिण भारतीय नक्षत्र पोरुथम दोनों जन्म नक्षत्रों को अपनी दस कसौटियों पर पढ़ता है, और कुंडली मिलान पूरा 36 अंकों का मिलान देता है।

क्या पुष्य मेरा नक्षत्र है?

तभी, जब आपके जन्म के समय चंद्रमा पुष्य में था। चंद्रमा एक नक्षत्र को लगभग एक दिन में पार करता है, इसलिए जन्म तिथि से अधिक से अधिक दो नक्षत्रों तक बात सिमटती है और जन्म समय से निर्णय होता है। पुष्य नक्षत्र पूरी तरह कर्क राशि (Cancer) में है, इसलिए पुष्य में स्थित हर चंद्रमा कर्क राशि का चंद्रमा होता है। अपना जन्म नक्षत्र जानें, अपनी चंद्र राशि देखें, या पूरी कुंडली बनाएँ।

सामान्य प्रश्न

पुष्य नक्षत्र: प्रश्न और उत्तर

पुष्य के बारे में छोटे उत्तर: इसका स्वामी, राशि, नाम के अक्षर, प्रतीक और गण।

आपके अपने जन्म नक्षत्र के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान चाहिए।

मेरा नक्षत्र जानें
पुष्य नक्षत्र का स्वामी कौन है?

पुष्य नक्षत्र का स्वामी शनि है। नक्षत्र का स्वामी तय करता है कि व्यक्ति किस विंशोत्तरी महादशा में जन्म लेता है, इसलिए जिसका चंद्रमा पुष्य में है, उसका जीवन शनि की महादशा से शुरू होता है। चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे तय होता है कि उस पहली दशा का कितना भाग बाकी है।

पुष्य नक्षत्र किस राशि में है?

पुष्य नक्षत्र पूरी तरह कर्क राशि (Cancer) में है, इसलिए पुष्य में स्थित हर चंद्रमा कर्क राशि का चंद्रमा होता है। एक नक्षत्र 13°20' का होता है और एक राशि 30° की, इसलिए अधिकतर नक्षत्र राशि की सीमा पार करते हैं और चरण से तय होता है कि कौन सी चंद्र राशि लागू होती है। चरण जन्म समय से तय होता है, इसीलिए एक ही नक्षत्र वाले दो लोगों की राशियाँ अलग हो सकती हैं।

पुष्य नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?

पुष्य नक्षत्र के नाम अक्षर हू, हे, हो और डा हैं, क्रम से हर चरण का एक। पारंपरिक नामकरण में बच्चे को ऐसा नाम दिया जाता है जो जन्म के समय चंद्रमा वाले चरण के अक्षर से शुरू हो, इसलिए नक्षत्र के साथ चरण भी जानना ज़रूरी है।

पुष्य नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?

पुष्य नक्षत्र का प्रतीक गाय का थन; कमल है और इसके अधिष्ठाता देवता बृहस्पति, देवगुरु हैं। परंपरा इस नक्षत्र का सार "सत्ताईस नक्षत्रों में सबसे शुभ" के रूप में बताती है, और प्रतीक और देवता ही इसके स्वभाव को पढ़ने का आरंभ बिंदु हैं। इसकी योनि का पशु, मेष, एक अलग वर्गीकरण है जिसका उपयोग विवाह मिलान में होता है।

पुष्य नक्षत्र का गण और नाड़ी क्या है?

पुष्य का गण देव है और नाड़ी मध्य (पित्त), और इसकी योनि का पशु मेष है। तीनों का उपयोग गुण मिलान में होता है, जो विवाह का 36 अंकों का मिलान है। नाड़ी का भार सबसे अधिक है, 8 अंक, और जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें इस पर शून्य अंक मिलता है; गण 6 अंक का होता है और योनि 4 का।

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