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नक्षत्र 2 · 27 में से 2

भरणी नक्षत्र (Bharani Nakshatra)

भरणी (Bharani) 27 नक्षत्रों में दूसरा नक्षत्र है, जो निरयन राशिचक्र में 13°20' से 26°40' तक फैला है। इसका स्वामी शुक्र है, इसके देवता यम, धर्म के स्वामी हैं और इसका प्रतीक योनि है। भरणी नक्षत्र पूरी तरह मेष राशि (Aries) में है, इसलिए भरणी में स्थित हर चंद्रमा मेष राशि का चंद्रमा होता है। परंपरा के अनुसार जिन बच्चों के जन्म के समय चंद्रमा यहाँ होता है, उनका नाम ली, लू, ले, लो अक्षरों से रखा जाता है।

  • स्वामी शुक्र
  • गण मनुष्य
  • राशि मेष
02 / 27 भरणी Bharani · 13°20' – 26°40'
“जो सहना है, उसे सहने वाला”
मुख्य तथ्य

भरणी नक्षत्र एक नज़र में

स्वामी ग्रह
शुक्रशुक्र की दशा से आरंभ
देवता
यमधर्म के स्वामी
प्रतीक
योनि
राशि
मेषAries
गण
मनुष्यस्वभाव
नाड़ी
मध्यपित्त
योनि (पशु)
गज
अंश
13°20' – 26°40'27 में से नक्षत्र 2
नाम के अक्षर
  • ली
  • लू
  • ले
  • लो
बच्चे के नाम के अक्षर

भरणी नक्षत्र का अर्थ

भरणी संयम का और चीज़ों को अंत तक निभाने का नक्षत्र है। इसके देवता यम हैं, जो धर्म और नैतिक नियम के अधिपति हैं, और इसका प्रतीक योनि है: सृजन और उसकी कीमत एक साथ। शुक्र इसका स्वामी है, और यह तीव्र इच्छा को सहने की असाधारण क्षमता के साथ जोड़ता है।

जिनका चंद्रमा भरणी में है

परंपरा भरणी का सार “जो सहना है, उसे सहने वाला” के रूप में बताती है। जिसका चंद्रमा यहाँ होता है, उसका जीवन शुक्र की महादशा से शुरू होता है, और इस नक्षत्र का गण मनुष्य है, जिसे इस रूप में पढ़ा जाता है: मानवीय स्वभाव, व्यावहारिक और अपने लक्ष्यों से प्रेरित। इसका प्रतीक, योनि, और इसके देवता, यम, धर्म के स्वामी, वे छवियाँ हैं जिनसे शास्त्र इसका वर्णन करते हैं। इन्हें किसी व्यक्ति का चित्र नहीं, नक्षत्र का स्वभाव मानें: बाकी कुंडली, चंद्रमा का बल और चल रही दशा तय करते हैं कि यह स्वभाव कैसे प्रकट होता है।

भरणी के चार चरण और नाम के अक्षर

हर नक्षत्र 3°20' के चार चरणों (पाद) में बँटा होता है। जन्म जिस चरण में पड़ता है, उससे नवांश (Navamsa) तय होता है और नामकरण की परंपरा में बच्चे के नाम का पहला अक्षर भी। भरणी के लिए ये अक्षर हैं ली, लू, ले, लो।

  • चरण 1 ली
    अंश
    13°20' – 16°40'
    राशि
    मेष
    नवांश
    सिंह
  • चरण 2 लू
    अंश
    16°40' – 20°00'
    राशि
    मेष
    नवांश
    कन्या
  • चरण 3 ले
    अंश
    20°00' – 23°20'
    राशि
    मेष
    नवांश
    तुला
  • चरण 4 लो
    अंश
    23°20' – 26°40'
    राशि
    मेष
    नवांश
    वृश्चिक

नक्षत्र से नाम के अक्षर वाला कैलकुलेटर चुने हुए चरण का अक्षर बताता है, और नाम से राशि वाला कैलकुलेटर उल्टी दिशा में काम करता है, नाम से उसकी राशि तक।

मिलान में भरणी का उपयोग

गुण मिलान (Guna Milan) इस नक्षत्र के तीन वर्गीकरण सीधे पढ़ता है। इसका गण मनुष्य है, जिसे स्वभाव के लिए साथी के गण से मिलाया जाता है। इसकी नाड़ी मध्य (पित्त) है: जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें सबसे बड़े कूट पर शून्य अंक मिलता है, जो 36 में से 8 अंक का है। इसकी योनि का पशु गज है, जिसे सहज अनुकूलता के लिए मिलाया जाता है। दक्षिण भारतीय नक्षत्र पोरुथम दोनों जन्म नक्षत्रों को अपनी दस कसौटियों पर पढ़ता है, और कुंडली मिलान पूरा 36 अंकों का मिलान देता है।

क्या भरणी मेरा नक्षत्र है?

तभी, जब आपके जन्म के समय चंद्रमा भरणी में था। चंद्रमा एक नक्षत्र को लगभग एक दिन में पार करता है, इसलिए जन्म तिथि से अधिक से अधिक दो नक्षत्रों तक बात सिमटती है और जन्म समय से निर्णय होता है। भरणी नक्षत्र पूरी तरह मेष राशि (Aries) में है, इसलिए भरणी में स्थित हर चंद्रमा मेष राशि का चंद्रमा होता है। अपना जन्म नक्षत्र जानें, अपनी चंद्र राशि देखें, या पूरी कुंडली बनाएँ।

सामान्य प्रश्न

भरणी नक्षत्र: प्रश्न और उत्तर

भरणी के बारे में छोटे उत्तर: इसका स्वामी, राशि, नाम के अक्षर, प्रतीक और गण।

आपके अपने जन्म नक्षत्र के लिए जन्म तिथि, समय और स्थान चाहिए।

मेरा नक्षत्र जानें
भरणी नक्षत्र का स्वामी कौन है?

भरणी नक्षत्र का स्वामी शुक्र है। नक्षत्र का स्वामी तय करता है कि व्यक्ति किस विंशोत्तरी महादशा में जन्म लेता है, इसलिए जिसका चंद्रमा भरणी में है, उसका जीवन शुक्र की महादशा से शुरू होता है। चंद्रमा नक्षत्र में कितना आगे बढ़ चुका था, इससे तय होता है कि उस पहली दशा का कितना भाग बाकी है।

भरणी नक्षत्र किस राशि में है?

भरणी नक्षत्र पूरी तरह मेष राशि (Aries) में है, इसलिए भरणी में स्थित हर चंद्रमा मेष राशि का चंद्रमा होता है। एक नक्षत्र 13°20' का होता है और एक राशि 30° की, इसलिए अधिकतर नक्षत्र राशि की सीमा पार करते हैं और चरण से तय होता है कि कौन सी चंद्र राशि लागू होती है। चरण जन्म समय से तय होता है, इसीलिए एक ही नक्षत्र वाले दो लोगों की राशियाँ अलग हो सकती हैं।

भरणी नक्षत्र के नाम अक्षर क्या हैं?

भरणी नक्षत्र के नाम अक्षर ली, लू, ले और लो हैं, क्रम से हर चरण का एक। पारंपरिक नामकरण में बच्चे को ऐसा नाम दिया जाता है जो जन्म के समय चंद्रमा वाले चरण के अक्षर से शुरू हो, इसलिए नक्षत्र के साथ चरण भी जानना ज़रूरी है।

भरणी नक्षत्र का प्रतीक और देवता क्या हैं?

भरणी नक्षत्र का प्रतीक योनि है और इसके अधिष्ठाता देवता यम, धर्म के स्वामी हैं। परंपरा इस नक्षत्र का सार "जो सहना है, उसे सहने वाला" के रूप में बताती है, और प्रतीक और देवता ही इसके स्वभाव को पढ़ने का आरंभ बिंदु हैं। इसकी योनि का पशु, गज, एक अलग वर्गीकरण है जिसका उपयोग विवाह मिलान में होता है।

भरणी नक्षत्र का गण और नाड़ी क्या है?

भरणी का गण मनुष्य है और नाड़ी मध्य (पित्त), और इसकी योनि का पशु गज है। तीनों का उपयोग गुण मिलान में होता है, जो विवाह का 36 अंकों का मिलान है। नाड़ी का भार सबसे अधिक है, 8 अंक, और जिन साथियों की नाड़ी एक होती है, उन्हें इस पर शून्य अंक मिलता है; गण 6 अंक का होता है और योनि 4 का।

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