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सूर्य · प्रथम भाव

प्रथम भाव में सूर्य

प्रथम भाव में सूर्य होने का अर्थ है सूर्य का स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण के भाव में बैठना। प्रथम भाव में सूर्य को आत्म-बोध की प्रबलता और स्वाभाविक अधिकार के रूप में पढ़ा जाता है: आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रभावशाली उपस्थिति और अच्छी जीवन-शक्ति, साथ में अहंकार पर नियंत्रण रखने की ज़रूरत। यह स्थिति कैसे काम करती है, यह सूर्य के बल पर और आपके लग्न के लिए उसके स्वामित्व वाले भावों पर निर्भर है।

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  • आपकी अपनी कुंडली से
  • कला-विकला तक सटीकहर ग्रह ठीक कला तक
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अपनी कुंडली में देखें: प्रथम भाव में सूर्य

हर भाव की राशि लग्न से तय होती है, इसलिए जन्म का समय भी उतना ही मायने रखता है जितनी तारीख़।

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आपको क्या मिलता है

प्रथम भाव में सूर्य की जाँच क्या दिखाती है

आपकी कुंडली में ग्रह कहाँ बैठा है, कितना बलवान है, और आपकी वास्तविक स्थिति का विवेचन।

  • आपकी स्थितिआपकी कुंडली में भाव, राशि और गरिमा।
  • यह किस ओर संकेत करती हैआपकी वास्तविक स्थिति का विवेचन।
  • यह कब सक्रिय होती हैवे दशाएँ जो इसे सामने लाती हैं।
  • वहाँ बैठे दूसरे ग्रहउस भाव में और क्या बैठा है, हर एक के लिंक के साथ।
यह कैसे काम करता है

प्रथम भाव में सूर्य कैसे जाँचें

तीन चरण और कुछ सेकंड। न कुछ इंस्टॉल करना है, न फ़ोन नंबर या खाते की ज़रूरत है।

  1. अपनी जन्म तिथि और समय डालें

    जन्म प्रमाणपत्र पर लिखा स्थानीय समय डालें। यहाँ कई उत्तर घंटे पर और कुछ मिनट पर भी निर्भर करते हैं।

  2. अपना जन्म स्थान चुनें

    सूची से शहर चुनें। उसी से अक्षांश और वह समय क्षेत्र तय होता है जिसमें आपका जन्म समय पढ़ा जाता है।

  3. परिणाम पढ़ें

    आपकी स्थिति और उसका विवेचन, कारण के साथ।

प्रथम भाव में सूर्य मार्गदर्शिका

प्रथम भाव में सूर्य: विस्तार से

लोग जो प्रश्न पूछते हैं, उनके छोटे उत्तर, हर एक के पीछे का तर्क साथ में।

प्रथम भाव में सूर्य का क्या अर्थ है?

प्रथम भाव में सूर्य को आत्म-बोध की प्रबलता और स्वाभाविक अधिकार के रूप में पढ़ा जाता है: आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रभावशाली उपस्थिति और अच्छी जीवन-शक्ति, साथ में अहंकार पर नियंत्रण रखने की ज़रूरत। प्रथम भाव, यानी लग्न, स्वयं का भाव है: शरीर, स्वभाव, जीवन-शक्ति और जीवन की दिशा। यह केंद्र (स्तंभ भाव) भी है और त्रिकोण (भाग्य भाव) भी, जो इसे कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण भाव बनाता है।

सूर्य प्रथम भाव में क्या लाता है?

सूर्य स्वयं, अधिकार, जीवन-शक्ति और पिता का स्वाभाविक कारक है: एक उष्ण, दृढ़ ग्रह जो जहाँ बैठता है वहाँ स्पष्टता और नेतृत्व लाता है, और जो ग्रह उसके बहुत पास हो उसे अस्त कर देता है। यह सिंह (अपनी स्वराशि) और मेष (अपनी उच्च राशि) में सबसे बलवान होता है, और तुला में सबसे निर्बल। प्रथम भाव में परंपरा इस स्वभाव को एक साथ तीन बातों से पढ़ती है: ग्रह का अपना चरित्र, आपके लग्न के लिए उसके स्वामित्व वाले भाव, और उसका बल; इसलिए एक ही सूर्य अलग-अलग कुंडलियों में अलग रंग देता है।

लग्न प्रथम भाव में सूर्य को कैसे बदलता है?

आपके प्रथम भाव में होने पर सूर्य किस राशि में होगा, यह लग्न पर निर्भर है, और उसके स्वामित्व वाले भाव और उसकी भूमिका भी। भाव लग्न से पूर्ण राशि भाव पद्धति (whole-sign) से गिने जाते हैं (प्लेसिडस या भाव चलित जैसी भाव-संधि पर आधारित पद्धति राशि की सीमा के पास बैठे ग्रह को अगले भाव में ले जा सकती है)। सूर्य यहाँ इन लग्नों के लिए सबसे बलवान है: मेष लग्न (मेष), सिंह लग्न (सिंह)। सबसे निर्बल यह इन लग्नों के लिए है: तुला लग्न (तुला)। स्वामित्व वाला स्तंभ दिखाता है कि सूर्य अपने साथ किन भावों को प्रथम भाव में लाता है।

लग्नप्रथम भाव की राशिगरिमास्वामित्वभूमिका
मेषमेषउच्च (सबसे बलवान)पंचमसहायक
वृषभवृषभशत्रु राशिचतुर्थसहायक
मिथुनमिथुनसम राशितृतीयकठिन
कर्ककर्कमित्र राशिद्वितीयतटस्थ
सिंहसिंहस्वराशि (बलवान)प्रथमसहायक
कन्याकन्यासम राशिद्वादशतटस्थ
तुलातुलानीच (सबसे निर्बल)एकादशकठिन
वृश्चिकवृश्चिकमित्र राशिदशमसबसे सहायक (योगकारक)
धनुधनुमित्र राशिनवमसहायक
मकरमकरशत्रु राशिअष्टमतटस्थ
कुंभकुंभशत्रु राशिसप्तमतटस्थ
मीनमीनमित्र राशिषष्ठकठिन

प्रथम भाव में सूर्य को क्या बलवान या निर्बल बनाता है?

यह स्थिति हर कुंडली में एक ही नाम रखती है, पर परंपरा इसके फल सूर्य के बल से पढ़ती है। गरिमा सबसे पहले: स्वराशि या उच्च राशि में बैठा ग्रह अपने फल अधिक पूरे देता है, और नीच राशि में बैठा ग्रह कम। साथ और दृष्टि इसके बाद: गुरु की दृष्टि को रक्षक माना जाता है, और साथ बैठे कठोर ग्रह को घर्षण बढ़ाने वाला। सूर्य से निकटता (अस्त होना) ग्रह को निर्बल करती है। और प्रथम भाव को स्वयं समग्र रूप से पढ़ा जाता है, जिसमें उसमें बैठे हर ग्रह और उसके अपने स्वामी की स्थिति को साथ तौला जाता है।

D9 से प्रथम भाव में सूर्य की पुष्टि कैसे होती है?

पाराशरी पद्धति जन्म कुंडली की किसी स्थिति को उसके विषय की वर्ग कुंडली में जाँचती है: प्रथम भाव के लिए यह नवांश (D9) है, जो भीतरी बल और जन्म कुंडली की हर स्थिति की पुष्टि के लिए देखा जाता है। यदि सूर्य वहाँ अपनी स्वराशि या उच्च राशि में है, तो परंपरा इस स्थिति को पुष्ट मानती है; यदि अपनी नीच राशि में है, तो रुका हुआ। वर्ग कुंडली राशिचक्र के हर 3 अंश 20 कला पर राशि बदलती है, इसलिए यह जन्म समय के प्रति संवेदनशील है, और मिनट तक सही समय से यह जाँच भरोसेमंद होती है। कुंडली विवेचन आपकी कुंडली के लिए यह जाँच करता है।

प्रथम भाव में सूर्य कब सक्रिय होता है?

परंपरा किसी स्थिति को जीवन भर की मानती है, पर उसमें शामिल ग्रह की दशाओं में सबसे अधिक सक्रिय। विंशोत्तरी दशा पद्धति में सूर्य की महादशा, जो 6 वर्ष चलती है, और उसकी अंतर्दशाएँ (antardasha) वह समय हैं जब इस स्थिति के विषय सबसे अधिक दिखाई देते माने जाते हैं, साथ में उन ग्रहों की दशाएँ भी जिनकी इस पर दृष्टि है या जो इसके साथ बैठे हैं। दशा कैलकुलेटर आपके जन्म के लिए ये दशाएँ दिखाता है, और कुंडली की समयरेखा चल रही दशा का विवेचन करती है।

प्रथम भाव में सूर्य के साथ और किन बातों को देखा जाता है?

परंपरा किसी भाव को एक स्थिति से कभी नहीं पढ़ती। प्रथम भाव का स्वाभाविक कारक भी है, सूर्य, जो स्वयं और जीवन-शक्ति का स्वाभाविक कारक है, और भाव तब सुदृढ़ माना जाता है जब उसका स्वामी और उसके कारक दोनों बलवान हों। प्रथम भाव पर गुरु की दृष्टि को रक्षक माना जाता है, उसमें कोई भी ग्रह बैठा हो। इस शृंखला के दूसरे पृष्ठ प्रथम भाव में हर ग्रह और हर भाव-स्वामी पर हैं, और कुंडली विवेचन आपकी कुंडली के लिए इन सबको साथ तौलता है।

KP प्रथम भाव में सूर्य को कैसे पढ़ता है?

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) जन्म के क्षण से भावों को असमान रूप में बाँटती है और प्रथम भाव को उसके आरंभ-बिंदु के उप-स्वामी (sub-lord) से परखती है। स्वयं और स्वभाव के लिए KP प्रथम, पंचम और एकादश भाव से संबंध को सहायक मानता है, और षष्ठ, अष्टम और द्वादश से संबंध को विरोधी। KP में सूर्य का महत्व इन्हीं संबंधों से है: यदि वह प्रथम भाव का कार्येश (significator) है, तो उसकी दशाओं को इस भाव के विषयों को आगे लाने वाला माना जाता है। कुंडली पृष्ठ पर KP विवेचन आपकी कुंडली के लिए यह दिखाता है।

यह गणना कैसे होती है

लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश के साथ निरयन राशियाँ और पूर्ण राशि भाव, कला-विकला की सटीकता तक। सूर्योदय और सूर्यास्त वही हैं जो पंचांग दिखाते हैं, यानी अपवर्तन सहित सूर्य का ऊपरी किनारा, ताकि दिन के मुहूर्त-काल उन कैलेंडरों से मेल खाएँ जिनसे आप इन्हें मिलाते हैं। हमारी विधि के बारे में और जानें।

सामान्य प्रश्न

प्रथम भाव में सूर्य: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छोटे उत्तर, हर उत्तर अपने आप में पूरा।

सबसे जल्दी उत्तर आपका अपना है। इसमें कुछ विवरण और कुछ ही सेकंड लगते हैं।

मेरा सूर्य देखें
प्रथम भाव में सूर्य का क्या अर्थ है?

प्रथम भाव में सूर्य का अर्थ है कि सूर्य आपके स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण के भाव में बैठा है। परंपरा उन विषयों में इसका अपना स्वभाव पढ़ती है, जिसे इसका बल और आपके लग्न के लिए इसके स्वामित्व वाले भाव ढालते हैं।

क्या प्रथम भाव में सूर्य शुभ है या अशुभ?

परंपरा प्रथम भाव में सूर्य को स्वयं और स्वभाव के लिए अधिक अनुकूल स्थितियों में से एक मानती है। सूर्य बलवान हो और राशि से अच्छी स्थिति में हो, तो यह सबसे अधिक देता है, और निर्बल या अस्त हो तो कम।

प्रथम भाव में Surya क्या है?

Surya रोमन अक्षरों में लिखा सूर्य का हिंदी और संस्कृत नाम है, इसलिए प्रथम भाव में Surya वही स्थिति है जिसका वर्णन इस पृष्ठ पर है।

स्वयं और स्वभाव के लिए प्रथम भाव में सूर्य का क्या अर्थ है?

प्रथम भाव में सूर्य को आत्म-बोध की प्रबलता और स्वाभाविक अधिकार के रूप में पढ़ा जाता है: आत्मविश्वास, नेतृत्व, प्रभावशाली उपस्थिति और अच्छी जीवन-शक्ति, साथ में अहंकार पर नियंत्रण रखने की ज़रूरत।

क्या प्रथम भाव में सूर्य हर लग्न के लिए एक जैसा काम करता है?

नहीं। प्रथम भाव में सूर्य किस राशि में होगा, यह लग्न के साथ बदलता है, और उसके स्वामित्व वाले भाव और उसकी भूमिका भी। इस पृष्ठ की तालिका सभी बारह लग्न दिखाती है, और नीचे का फ़ॉर्म आपकी अपनी कुंडली पढ़ता है।

क्या प्रथम भाव में सूर्य और पहले भाव में सूर्य एक ही बात है?

हाँ। प्रथम भाव और पहला भाव एक ही भाव हैं, यानी लग्न, इसलिए दोनों नाम इसी पृष्ठ पर बताई गई स्थिति के हैं।

क्या प्रथम भाव में सूर्य देखने के लिए जन्म समय चाहिए?

हाँ। लग्न ही तय करता है कि कौन-सी राशि आपका प्रथम भाव है और हर भाव का स्वामी कौन-सा ग्रह है, और लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए जन्म समय चाहिए। वर्ग कुंडली की जाँच के लिए समय कुछ मिनटों तक सही होना चाहिए।

अपनी कुंडली में प्रथम भाव में सूर्य कैसे देखें?

लग्न से 1 राशि गिनें, यानी लग्न की राशि ही; यदि सूर्य उस राशि में बैठा है, तो वह आपके प्रथम भाव में है। इस पृष्ठ का फ़ॉर्म यह जाँचकर दिखाता है कि वह कहाँ बैठा है।

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हर जन्म विवरण एक बार सहेजें। फिर हर कैलकुलेटर आपके, आपके माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों के लिए पहले से गणना करके खुलता है।

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