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बुध महादशा · 17 वर्ष

बुध महादशा के प्रभाव

बुध महादशा (Budh Mahadasha) बुध की सत्रह वर्ष की मुख्य अवधि है, जो बुद्धि, वाणी, व्यापार और विद्या का ग्रह है। परंपरा इसे ऐसा समय मानती है जिसमें अनुकूलनशीलता का फल मिलता है: व्यापार, अध्ययन, लेखन, बातचीत और संवाद आगे आते हैं, और इसका स्वर आपकी कुंडली में बुध के बल और उसके साथ बैठे ग्रहों से तय होता है।

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अपनी बुध महादशा की तिथियाँ जानें

दशा की तिथियाँ जन्म के समय चंद्र की सटीक स्थिति से निकलती हैं, इसलिए जन्म का समय उतना ही मायने रखता है जितनी तिथि।

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आपको क्या मिलता है

बुध महादशा जाँच क्या दिखाती है

आपकी बुध दशा कब चलती है, आपकी कुंडली में यह कैसे पढ़ी जाती है, और इसकी अंतर्दशाएँ उनकी तिथियों के साथ।

  • आपकी तिथियाँआपकी बुध दशा कब आरंभ होती है और कब समाप्त।
  • यह कैसे पढ़ी जाती हैआपकी कुंडली में बुध की भूमिका, राशिगत स्थिति, भाव और बल।
  • यह क्या लाती हैजीवन के वे क्षेत्र जिन्हें यह आपके लिए आगे लाती है।
  • अंतर्दशाएँसभी नौ अंतर्दशाएँ उनकी तिथियों के साथ।
यह कैसे काम करता है

अपनी बुध महादशा कैसे जानें

तीन चरण और कुछ सेकंड। न कुछ इंस्टॉल करना है, न फ़ोन नंबर या खाते की ज़रूरत है।

  1. अपनी जन्म तिथि और समय डालें

    जन्म प्रमाणपत्र पर लिखा स्थानीय समय डालें। यहाँ कई उत्तर घंटे पर और कुछ मिनट पर भी निर्भर करते हैं।

  2. अपना जन्म स्थान चुनें

    सूची से शहर चुनें। उसी से अक्षांश और वह समय क्षेत्र तय होता है जिसमें आपका जन्म समय पढ़ा जाता है।

  3. परिणाम पढ़ें

    आपकी तिथियाँ, विवेचन और अंतर्दशाएँ, कारणों के साथ।

बुध महादशा मार्गदर्शिका

बुध महादशा, विस्तार से

लोग जो प्रश्न पूछते हैं, उनके छोटे उत्तर, हर एक के पीछे का तर्क साथ में।

बुध महादशा क्या है?

बुध महादशा विंशोत्तरी दशा (Vimshottari dasha) पद्धति में बुध की मुख्य अवधि है; यह पद्धति 120 वर्ष के एक चक्र को नौ ग्रहों में एक निश्चित क्रम से बाँटती है। इसमें बुध का हिस्सा 17 वर्ष है। क्रम में यह शनि महादशा के बाद और केतु महादशा से पहले आती है। कोई व्यक्ति चक्र में कहाँ से प्रवेश करता है, यह उस नक्षत्र पर निर्भर है जिसमें जन्म के समय चंद्र था, इसलिए किसी का जीवन बुध की दशा में आरंभ हो सकता है, जबकि कोई और उस तक बाद के वर्षों में पहुँचता है, या जीवनकाल में पहुँचता ही नहीं।

बुध महादशा क्या लाती है?

बुध बुद्धि, वाणी, वाणिज्य और विद्या का कारक है, और इसकी दशा को ऐसा समय माना जाता है जिसमें मन और उसके कौशल आगे रहते हैं। परंपरा इसे शिक्षा, व्यापार, लेखन, हिसाब-किताब, तकनीक और संवाद पर निर्भर हर काम से जोड़ती है। बुध जिन ग्रहों के साथ बैठता है, उन्हीं का स्वभाव ले लेता है, इसलिए आपकी कुंडली में उसकी युति इस दशा को गहराई से रंगती है: शुभ ग्रहों के साथ इसे उत्पादक और कुशल पढ़ा जाता है, कठोर ग्रहों के साथ बेचैन या बिखरा हुआ।

आपका लग्न बुध महादशा को कैसे बदलता है?

बुध किन भावों का स्वामी है, यह आपके लग्न (Lagna, Ascendant) पर निर्भर करता है, और वही भाव इसकी दशा में आगे आते हैं। तालिका सभी बारह लग्नों के लिए पाराशरी पद्धति में बुध की भूमिका देती है। वृषभ, मिथुन, कन्या, तुला, मकर लग्न के लिए भी यह एक सहायक ग्रह है।

लग्नबुध किन भावों का स्वामीभूमिका
मेषतृतीय और षष्ठकठिन
वृषभद्वितीय और पंचमसहायक
मिथुनप्रथम और चतुर्थसहायक
कर्कतृतीय और द्वादशकठिन
सिंहद्वितीय और एकादशकठिन
कन्याप्रथम और दशमसहायक
तुलानवम और द्वादशसहायक
वृश्चिकअष्टम और एकादशकठिन
धनुसप्तम और दशमतटस्थ
मकरषष्ठ और नवमसहायक
कुंभपंचम और अष्टममिश्रित
मीनचतुर्थ और सप्तमकठिन

बुध महादशा को अनुकूल या कठिन क्या बनाता है?

परंपरा बुध की दशा को आपकी कुंडली में इस ग्रह की स्थिति से पढ़ती है। सबसे पहले आपके लग्न के लिए इसकी भूमिका। फिर इसकी राशिगत स्थिति: बुध मिथुन, कन्या (अपनी राशियों) और कन्या (अपनी उच्च राशि) में सबसे बलवान है, और मीन में सबसे निर्बल। इसका भाव: बुध जैसा नैसर्गिक शुभ ग्रह केंद्र और त्रिकोण भावों (प्रथम, चतुर्थ, पंचम, सप्तम, नवम, दशम) में सबसे अच्छा रहता है, और अष्टम व द्वादश में सबसे कठिन माना जाता है। और कुल मिलाकर इसका बल। कुंडली विवेचन आपकी कुंडली के लिए इन चारों को अंक देता है।

बुध महादशा में कौन-सी अंतर्दशाएँ होती हैं?

हर महादशा नौ अंतर्दशाओं (antardasha) में बँटी होती है, हर ग्रह की एक, उसी निश्चित क्रम में, और पहली अंतर्दशा बुध की अपनी होती है। हर अंतर्दशा चक्र में अपने ग्रह के हिस्से के अनुपात में चलती है। परंपरा किसी अंतर्दशा को उसके अपने ग्रह से पढ़ती है, और इस बात से भी कि आपकी कुंडली में वह ग्रह बुध से गिनने पर कहाँ है: उससे केंद्र या त्रिकोण भाव में हो तो दोनों को सहयोगी माना जाता है, जबकि उससे छठे, आठवें या बारहवें स्थान पर हो तो दोनों अलग-अलग दिशाओं में खिंचते माने जाते हैं।

बुध महादशा में बुध अंतर्दशा: 2 वर्ष 4 महीने 27 दिन

महादशा अपनी ही अंतर्दशा से आरंभ होती है, जो 2 वर्ष 4 महीने 27 दिन की होती है, और इसमें बुध के विषय (विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत) सबसे स्पष्ट रूप से दिखते हैं। परंपरा मानती है कि यह पहला चरण जैसा जाता है, उससे पूरी दशा के स्वर का संकेत मिलता है, और दशा के आरंभ को ध्यान से देखने योग्य मानती है।

बुध महादशा में केतु अंतर्दशा: 11 महीने 27 दिन

केतु अपने विषयों (विरक्ति, समापन और आंतरिक साधना) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 11 महीने 27 दिन की है और नौ अंतर्दशाओं में दूसरी है। इनका नैसर्गिक संबंध तटस्थ है, इसलिए स्वर मुख्य रूप से इस पर टिका है कि आपकी अपनी कुंडली में दोनों कहाँ स्थित हैं। यह मध्यम लंबाई की अंतर्दशा है, इतनी लंबी कि अपना अलग रंग दिखा सके।

बुध महादशा में शुक्र अंतर्दशा: 2 वर्ष 10 महीने

शुक्र अपने विषयों (संबंध, सुख-सुविधा, कला और वाहन) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 2 वर्ष 10 महीने की है और नौ अंतर्दशाओं में तीसरी है। बुध और शुक्र नैसर्गिक मित्र हैं, जिसे परंपरा एक अधिक सहज चरण के रूप में पढ़ती है, जिसमें दोनों के विषय एक-दूसरे का साथ देते हैं। लंबी अंतर्दशाओं में से एक होने के कारण इसे मुख्य दशा के भीतर अपना अलग अध्याय माना जाता है।

बुध महादशा में सूर्य अंतर्दशा: 10 महीने 6 दिन

सूर्य अपने विषयों (दृश्यता, अधिकार और पिता) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 10 महीने 6 दिन की है और नौ अंतर्दशाओं में चौथी है। इनका नैसर्गिक संबंध तटस्थ है, इसलिए स्वर मुख्य रूप से इस पर टिका है कि आपकी अपनी कुंडली में दोनों कहाँ स्थित हैं। यह मध्यम लंबाई की अंतर्दशा है, इतनी लंबी कि अपना अलग रंग दिखा सके।

बुध महादशा में चंद्र अंतर्दशा: 1 वर्ष 5 महीने

चंद्र अपने विषयों (मन, माता, घर और यात्रा) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 1 वर्ष 5 महीने की है और नौ अंतर्दशाओं में पाँचवीं है। इनका नैसर्गिक संबंध एकतरफ़ा है, एक दूसरे को मित्र मानता है पर दूसरा उसे नहीं, इसलिए स्वर मुख्य रूप से इस पर टिका है कि आपकी अपनी कुंडली में दोनों कहाँ स्थित हैं। यह मध्यम लंबाई की अंतर्दशा है, इतनी लंबी कि अपना अलग रंग दिखा सके।

बुध महादशा में मंगल अंतर्दशा: 11 महीने 27 दिन

मंगल अपने विषयों (कर्मठता, संपत्ति, भाई-बहन और प्रतिस्पर्धा) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 11 महीने 27 दिन की है और नौ अंतर्दशाओं में छठी है। इनका नैसर्गिक संबंध तटस्थ है, इसलिए स्वर मुख्य रूप से इस पर टिका है कि आपकी अपनी कुंडली में दोनों कहाँ स्थित हैं। यह मध्यम लंबाई की अंतर्दशा है, इतनी लंबी कि अपना अलग रंग दिखा सके।

बुध महादशा में राहु अंतर्दशा: 2 वर्ष 6 महीने 18 दिन

राहु अपने विषयों (महत्वाकांक्षा, नवीनता और विदेश) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 2 वर्ष 6 महीने 18 दिन की है और नौ अंतर्दशाओं में सातवीं है। इनका नैसर्गिक संबंध तटस्थ है, इसलिए स्वर मुख्य रूप से इस पर टिका है कि आपकी अपनी कुंडली में दोनों कहाँ स्थित हैं। लंबी अंतर्दशाओं में से एक होने के कारण इसे मुख्य दशा के भीतर अपना अलग अध्याय माना जाता है।

बुध महादशा में गुरु अंतर्दशा: 2 वर्ष 3 महीने 6 दिन

गुरु अपने विषयों (विकास, अध्यापन, संतान और अच्छी सलाह) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 2 वर्ष 3 महीने 6 दिन की है और नौ अंतर्दशाओं में आठवीं है। इनका नैसर्गिक संबंध तटस्थ है, इसलिए स्वर मुख्य रूप से इस पर टिका है कि आपकी अपनी कुंडली में दोनों कहाँ स्थित हैं। यह मध्यम लंबाई की अंतर्दशा है, इतनी लंबी कि अपना अलग रंग दिखा सके।

बुध महादशा में शनि अंतर्दशा: 2 वर्ष 8 महीने 9 दिन

शनि अपने विषयों (काम, अनुशासन, ज़िम्मेदारी और धीमी प्रगति) को बुध की दशा में लाता है, जिसके विषय विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत हैं; यह अंतर्दशा 2 वर्ष 8 महीने 9 दिन की है और नौ अंतर्दशाओं में नौवीं है। इनका नैसर्गिक संबंध तटस्थ है, इसलिए स्वर मुख्य रूप से इस पर टिका है कि आपकी अपनी कुंडली में दोनों कहाँ स्थित हैं। लंबी अंतर्दशाओं में से एक होने के कारण इसे मुख्य दशा के भीतर अपना अलग अध्याय माना जाता है।

बुध महादशा में फल सबसे अधिक कब दिखते हैं?

परंपरा किसी ग्रह के फलों का समय उसकी दशा के भीतर इस बात से तय करती है कि जन्म के समय वह अपनी राशि के किस भाग में था: राशि के पहले तिहाई भाग में बैठा ग्रह दशा के आरंभ में फल देता माना जाता है, बीच के तिहाई में हो तो बीच में, और अंतिम तिहाई में हो तो अंत की ओर। वक्री ग्रह और छाया ग्रहों (राहु और केतु) के लिए यह क्रम उलट जाता है। अंतर्दशाएँ इसके ऊपर एक सूक्ष्म लय जोड़ती हैं, और शनि व गुरु जैसे धीमे ग्रहों के गोचर एक और। कुंडली की समय-रेखा दिखाती है कि आपकी अपनी दशा पर कौन-सा तिहाई भाग लागू होता है।

मैं अपनी बुध महादशा की तिथियाँ कैसे जानूँ?

आपकी दशा की तिथियाँ जन्म के समय चंद्र की सटीक स्थिति से निकलती हैं। चंद्र जिस नक्षत्र में था, उससे तय होता है कि आपका जन्म किस दशा में हुआ, और चंद्र उस नक्षत्र में कितना आगे जा चुका था, उससे तय होता है कि उस दशा का कितना भाग पहले ही बीत चुका था। उसके बाद सब कुछ निश्चित क्रम से चलता है। विंशोत्तरी दशा कैलकुलेटर आपकी बुध दशा और उसकी अंतर्दशाएँ बताता है, और इस पृष्ठ का फ़ॉर्म दिखाता है कि आपकी दशा कब चलती है, यदि वह आपके जीवनकाल में आती है।

यह गणना कैसे होती है

लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश के साथ निरयन राशियाँ और पूर्ण राशि भाव, कला-विकला की सटीकता तक। सूर्योदय और सूर्यास्त वही हैं जो पंचांग दिखाते हैं, यानी अपवर्तन सहित सूर्य का ऊपरी किनारा, ताकि दिन के मुहूर्त-काल उन कैलेंडरों से मेल खाएँ जिनसे आप इन्हें मिलाते हैं। हमारी विधि के बारे में और जानें।

सामान्य प्रश्न

बुध महादशा: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छोटे उत्तर, हर उत्तर अपने आप में पूरा।

सबसे जल्दी उत्तर आपका अपना है। इसमें कुछ विवरण और कुछ ही सेकंड लगते हैं।

मेरी बुध महादशा जानें
बुध महादशा क्या है?

बुध महादशा विंशोत्तरी दशा पद्धति में बुध की 17 वर्ष की मुख्य अवधि है। परंपरा इसे विद्या, व्यापार, लेखन और बातचीत से जोड़ती है, और यह कैसे खुलती है, इसे आपकी अपनी कुंडली में बुध के बल और भूमिका से पढ़ती है।

बुध महादशा कितनी लंबी होती है?

बुध महादशा 17 वर्ष चलती है, और नौ अंतर्दशाओं में बँटी होती है। इसकी अपनी अंतर्दशा 2 वर्ष 4 महीने 27 दिन की होती है; सबसे लंबी अंतर्दशा शुक्र की है, 2 वर्ष 10 महीने की, और सबसे छोटी सूर्य की, 10 महीने 6 दिन की।

बुध महादशा अच्छी है या बुरी?

बुध महादशा को सामान्यतः विद्या, व्यापार और संवाद के लिए अनुकूल माना जाता है, विशेषकर जब बुध बलवान हो, मिथुन या कन्या में हो, और अच्छे ग्रहों के साथ हो। जब बुध निर्बल, अस्त या मीन में हो, तो परंपरा बिखरे मन और चिंता को संभालने की बात पढ़ती है।

बुध महादशा में कौन-सी अंतर्दशा सबसे अच्छी है?

परंपरा बुध के नैसर्गिक मित्रों की अंतर्दशाओं को अधिक सहज पढ़ती है: बुध महादशा में ये हैं शुक्र। आपकी अपनी कुंडली में हर ग्रह बुध से गिनने पर कहाँ है, यह मित्रता से अधिक मायने रखता है।

Budh mahadasha क्या है?

Budh (बुध) इस ग्रह का हिंदी और संस्कृत नाम है, जिसे अंग्रेज़ी में Mercury कहते हैं, इसलिए Budh mahadasha वही 17 वर्ष की बुध महादशा है जिसका वर्णन इस पृष्ठ पर है।

बुध महादशा के बाद क्या आता है?

इसके बाद केतु महादशा आती है, जो 7 वर्ष चलती है। परंपरा इसे विरक्ति, समापन और आंतरिक साधना से जोड़ती है, और दोनों दशाओं के बीच के बदलाव को अक्सर जीवन के मुख्य विषयों में बदलाव के रूप में पढ़ा जाता है।

क्या बुध महादशा व्यापार के लिए अच्छी है?

परंपरा बुध को व्यापार, मोल-भाव और वाणिज्य से जोड़ती है, इसलिए इसकी दशा को अक्सर व्यापार के लिए पढ़ा जाता है। आपकी कुंडली में बलवान बुध इस पाठ का समर्थन करता है; अस्त बुध सावधान योजना माँगता है।

क्या बुध महादशा पढ़ाई में सहायक होती है?

बुध विद्या और बुद्धि का ग्रह है, इसलिए इसकी दशा को अध्ययन, परीक्षाओं और नए कौशलों के अनुकूल माना जाता है, और अधिक तब, जब बुध बलवान हो और चतुर्थ या पंचम भाव से जुड़ा हो।

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नवग्रह · नौ ग्रह

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