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चंद्र · प्रथम भाव

प्रथम भाव में चंद्र

प्रथम भाव में चंद्र होने का अर्थ है चंद्र का स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण के भाव में बैठना। प्रथम भाव में चंद्र को भावुक, ग्रहणशील और मिलनसार स्वभाव के रूप में पढ़ा जाता है: सुखद, बदलता मिज़ाज जिसकी मनोदशा शरीर और दृष्टिकोण को आकार देती है, और बढ़ते चंद्र के साथ यह सबसे प्रबल होता है। यह स्थिति कैसे काम करती है, यह चंद्र के बल पर और आपके लग्न के लिए उसके स्वामित्व वाले भावों पर निर्भर है।

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  • आपकी अपनी कुंडली से
  • कला-विकला तक सटीकहर ग्रह ठीक कला तक
  • लाहिरी अयनांशभारतीय पंचांग का मानक
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अपनी कुंडली में देखें: प्रथम भाव में चंद्र

हर भाव की राशि लग्न से तय होती है, इसलिए जन्म का समय भी उतना ही मायने रखता है जितनी तारीख़।

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आपको क्या मिलता है

प्रथम भाव में चंद्र की जाँच क्या दिखाती है

आपकी कुंडली में ग्रह कहाँ बैठा है, कितना बलवान है, और आपकी वास्तविक स्थिति का विवेचन।

  • आपकी स्थितिआपकी कुंडली में भाव, राशि और गरिमा।
  • यह किस ओर संकेत करती हैआपकी वास्तविक स्थिति का विवेचन।
  • यह कब सक्रिय होती हैवे दशाएँ जो इसे सामने लाती हैं।
  • वहाँ बैठे दूसरे ग्रहउस भाव में और क्या बैठा है, हर एक के लिंक के साथ।
यह कैसे काम करता है

प्रथम भाव में चंद्र कैसे जाँचें

तीन चरण और कुछ सेकंड। न कुछ इंस्टॉल करना है, न फ़ोन नंबर या खाते की ज़रूरत है।

  1. अपनी जन्म तिथि और समय डालें

    जन्म प्रमाणपत्र पर लिखा स्थानीय समय डालें। यहाँ कई उत्तर घंटे पर और कुछ मिनट पर भी निर्भर करते हैं।

  2. अपना जन्म स्थान चुनें

    सूची से शहर चुनें। उसी से अक्षांश और वह समय क्षेत्र तय होता है जिसमें आपका जन्म समय पढ़ा जाता है।

  3. परिणाम पढ़ें

    आपकी स्थिति और उसका विवेचन, कारण के साथ।

प्रथम भाव में चंद्र मार्गदर्शिका

प्रथम भाव में चंद्र: विस्तार से

लोग जो प्रश्न पूछते हैं, उनके छोटे उत्तर, हर एक के पीछे का तर्क साथ में।

प्रथम भाव में चंद्र का क्या अर्थ है?

प्रथम भाव में चंद्र को भावुक, ग्रहणशील और मिलनसार स्वभाव के रूप में पढ़ा जाता है: सुखद, बदलता मिज़ाज जिसकी मनोदशा शरीर और दृष्टिकोण को आकार देती है, और बढ़ते चंद्र के साथ यह सबसे प्रबल होता है। प्रथम भाव, यानी लग्न, स्वयं का भाव है: शरीर, स्वभाव, जीवन-शक्ति और जीवन की दिशा। यह केंद्र (स्तंभ भाव) भी है और त्रिकोण (भाग्य भाव) भी, जो इसे कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण भाव बनाता है।

चंद्र प्रथम भाव में क्या लाता है?

चंद्र मन, माता, भावनाओं और जनता का कारक है। उसके फल उसकी कला के साथ चलते हैं: बढ़ते चंद्र को कोमल, शुभ प्रभाव माना जाता है, और घटते चंद्र को निर्बल। यह कर्क (अपनी स्वराशि) और वृषभ (अपनी उच्च राशि) में सबसे बलवान होता है, और वृश्चिक में सबसे निर्बल। प्रथम भाव में परंपरा इस स्वभाव को एक साथ तीन बातों से पढ़ती है: ग्रह का अपना चरित्र, आपके लग्न के लिए उसके स्वामित्व वाले भाव, और उसका बल; इसलिए एक ही चंद्र अलग-अलग कुंडलियों में अलग रंग देता है।

लग्न प्रथम भाव में चंद्र को कैसे बदलता है?

आपके प्रथम भाव में होने पर चंद्र किस राशि में होगा, यह लग्न पर निर्भर है, और उसके स्वामित्व वाले भाव और उसकी भूमिका भी। भाव लग्न से पूर्ण राशि भाव पद्धति (whole-sign) से गिने जाते हैं (प्लेसिडस या भाव चलित जैसी भाव-संधि पर आधारित पद्धति राशि की सीमा के पास बैठे ग्रह को अगले भाव में ले जा सकती है)। चंद्र यहाँ इन लग्नों के लिए सबसे बलवान है: वृषभ लग्न (वृषभ), कर्क लग्न (कर्क)। सबसे निर्बल यह इन लग्नों के लिए है: वृश्चिक लग्न (वृश्चिक)। स्वामित्व वाला स्तंभ दिखाता है कि चंद्र अपने साथ किन भावों को प्रथम भाव में लाता है।

लग्नप्रथम भाव की राशिगरिमास्वामित्वभूमिका
मेषमेषसम राशिचतुर्थमिश्रित
वृषभवृषभउच्च (सबसे बलवान)तृतीयकठिन
मिथुनमिथुनमित्र राशिद्वितीयतटस्थ
कर्ककर्कस्वराशि (बलवान)प्रथमसहायक
सिंहसिंहमित्र राशिद्वादशतटस्थ
कन्याकन्यामित्र राशिएकादशकठिन
तुलातुलासम राशिदशमसहायक
वृश्चिकवृश्चिकनीच (सबसे निर्बल)नवमसबसे सहायक (योगकारक)
धनुधनुसम राशिअष्टमतटस्थ
मकरमकरसम राशिसप्तमकठिन
कुंभकुंभसम राशिषष्ठकठिन
मीनमीनसम राशिपंचमसहायक

प्रथम भाव में चंद्र को क्या बलवान या निर्बल बनाता है?

यह स्थिति हर कुंडली में एक ही नाम रखती है, पर परंपरा इसके फल चंद्र के बल से पढ़ती है। गरिमा सबसे पहले: स्वराशि या उच्च राशि में बैठा ग्रह अपने फल अधिक पूरे देता है, और नीच राशि में बैठा ग्रह कम। साथ और दृष्टि इसके बाद: गुरु की दृष्टि को रक्षक माना जाता है, और साथ बैठे कठोर ग्रह को घर्षण बढ़ाने वाला। सूर्य से निकटता (अस्त होना) ग्रह को निर्बल करती है। और प्रथम भाव को स्वयं समग्र रूप से पढ़ा जाता है, जिसमें उसमें बैठे हर ग्रह और उसके अपने स्वामी की स्थिति को साथ तौला जाता है।

D9 से प्रथम भाव में चंद्र की पुष्टि कैसे होती है?

पाराशरी पद्धति जन्म कुंडली की किसी स्थिति को उसके विषय की वर्ग कुंडली में जाँचती है: प्रथम भाव के लिए यह नवांश (D9) है, जो भीतरी बल और जन्म कुंडली की हर स्थिति की पुष्टि के लिए देखा जाता है। यदि चंद्र वहाँ अपनी स्वराशि या उच्च राशि में है, तो परंपरा इस स्थिति को पुष्ट मानती है; यदि अपनी नीच राशि में है, तो रुका हुआ। वर्ग कुंडली राशिचक्र के हर 3 अंश 20 कला पर राशि बदलती है, इसलिए यह जन्म समय के प्रति संवेदनशील है, और मिनट तक सही समय से यह जाँच भरोसेमंद होती है। कुंडली विवेचन आपकी कुंडली के लिए यह जाँच करता है।

प्रथम भाव में चंद्र कब सक्रिय होता है?

परंपरा किसी स्थिति को जीवन भर की मानती है, पर उसमें शामिल ग्रह की दशाओं में सबसे अधिक सक्रिय। विंशोत्तरी दशा पद्धति में चंद्र की महादशा, जो 10 वर्ष चलती है, और उसकी अंतर्दशाएँ (antardasha) वह समय हैं जब इस स्थिति के विषय सबसे अधिक दिखाई देते माने जाते हैं, साथ में उन ग्रहों की दशाएँ भी जिनकी इस पर दृष्टि है या जो इसके साथ बैठे हैं। दशा कैलकुलेटर आपके जन्म के लिए ये दशाएँ दिखाता है, और कुंडली की समयरेखा चल रही दशा का विवेचन करती है।

प्रथम भाव में चंद्र के साथ और किन बातों को देखा जाता है?

परंपरा किसी भाव को एक स्थिति से कभी नहीं पढ़ती। प्रथम भाव का स्वाभाविक कारक भी है, सूर्य, जो स्वयं और जीवन-शक्ति का स्वाभाविक कारक है, और भाव तब सुदृढ़ माना जाता है जब उसका स्वामी और उसके कारक दोनों बलवान हों। प्रथम भाव पर गुरु की दृष्टि को रक्षक माना जाता है, उसमें कोई भी ग्रह बैठा हो। इस शृंखला के दूसरे पृष्ठ प्रथम भाव में हर ग्रह और हर भाव-स्वामी पर हैं, और कुंडली विवेचन आपकी कुंडली के लिए इन सबको साथ तौलता है।

KP प्रथम भाव में चंद्र को कैसे पढ़ता है?

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) जन्म के क्षण से भावों को असमान रूप में बाँटती है और प्रथम भाव को उसके आरंभ-बिंदु के उप-स्वामी (sub-lord) से परखती है। स्वयं और स्वभाव के लिए KP प्रथम, पंचम और एकादश भाव से संबंध को सहायक मानता है, और षष्ठ, अष्टम और द्वादश से संबंध को विरोधी। KP में चंद्र का महत्व इन्हीं संबंधों से है: यदि वह प्रथम भाव का कार्येश (significator) है, तो उसकी दशाओं को इस भाव के विषयों को आगे लाने वाला माना जाता है। कुंडली पृष्ठ पर KP विवेचन आपकी कुंडली के लिए यह दिखाता है।

यह गणना कैसे होती है

लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश के साथ निरयन राशियाँ और पूर्ण राशि भाव, कला-विकला की सटीकता तक। सूर्योदय और सूर्यास्त वही हैं जो पंचांग दिखाते हैं, यानी अपवर्तन सहित सूर्य का ऊपरी किनारा, ताकि दिन के मुहूर्त-काल उन कैलेंडरों से मेल खाएँ जिनसे आप इन्हें मिलाते हैं। हमारी विधि के बारे में और जानें।

सामान्य प्रश्न

प्रथम भाव में चंद्र: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छोटे उत्तर, हर उत्तर अपने आप में पूरा।

सबसे जल्दी उत्तर आपका अपना है। इसमें कुछ विवरण और कुछ ही सेकंड लगते हैं।

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प्रथम भाव में चंद्र का क्या अर्थ है?

प्रथम भाव में चंद्र का अर्थ है कि चंद्र आपके स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण के भाव में बैठा है। परंपरा उन विषयों में इसका अपना स्वभाव पढ़ती है, जिसे इसका बल और आपके लग्न के लिए इसके स्वामित्व वाले भाव ढालते हैं।

क्या प्रथम भाव में चंद्र शुभ है या अशुभ?

परंपरा प्रथम भाव में चंद्र को स्वयं और स्वभाव के लिए मिश्रित मानती है: वास्तविक खूबियाँ भी, और ऐसे विषय भी जो सावधानी माँगते हैं। उसकी राशि, उसका बल और आपके लग्न के लिए उसके स्वामित्व वाले भाव तय करते हैं कि कौन-सा पक्ष अधिक दिखता है।

प्रथम भाव में Chandra क्या है?

Chandra रोमन अक्षरों में लिखा चंद्र का हिंदी और संस्कृत नाम है, इसलिए प्रथम भाव में Chandra वही स्थिति है जिसका वर्णन इस पृष्ठ पर है।

स्वयं और स्वभाव के लिए प्रथम भाव में चंद्र का क्या अर्थ है?

प्रथम भाव में चंद्र को भावुक, ग्रहणशील और मिलनसार स्वभाव के रूप में पढ़ा जाता है: सुखद, बदलता मिज़ाज जिसकी मनोदशा शरीर और दृष्टिकोण को आकार देती है, और बढ़ते चंद्र के साथ यह सबसे प्रबल होता है।

क्या प्रथम भाव में चंद्र हर लग्न के लिए एक जैसा काम करता है?

नहीं। प्रथम भाव में चंद्र किस राशि में होगा, यह लग्न के साथ बदलता है, और उसके स्वामित्व वाले भाव और उसकी भूमिका भी। इस पृष्ठ की तालिका सभी बारह लग्न दिखाती है, और नीचे का फ़ॉर्म आपकी अपनी कुंडली पढ़ता है।

क्या प्रथम भाव में चंद्र और पहले भाव में चंद्र एक ही बात है?

हाँ। प्रथम भाव और पहला भाव एक ही भाव हैं, यानी लग्न, इसलिए दोनों नाम इसी पृष्ठ पर बताई गई स्थिति के हैं।

क्या प्रथम भाव में चंद्र देखने के लिए जन्म समय चाहिए?

हाँ। लग्न ही तय करता है कि कौन-सी राशि आपका प्रथम भाव है और हर भाव का स्वामी कौन-सा ग्रह है, और लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए जन्म समय चाहिए। वर्ग कुंडली की जाँच के लिए समय कुछ मिनटों तक सही होना चाहिए।

अपनी कुंडली में प्रथम भाव में चंद्र कैसे देखें?

लग्न से 1 राशि गिनें, यानी लग्न की राशि ही; यदि चंद्र उस राशि में बैठा है, तो वह आपके प्रथम भाव में है। इस पृष्ठ का फ़ॉर्म यह जाँचकर दिखाता है कि वह कहाँ बैठा है।

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हर जन्म विवरण एक बार सहेजें। फिर हर कैलकुलेटर आपके, आपके माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों के लिए पहले से गणना करके खुलता है।

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