ॐ सर्वे भवन्तु सुखिनः

लोकप्रिय टूल

सभी 119 टूल देखें

तृतीयेश · प्रथम भाव

प्रथम भाव में तृतीयेश

प्रथम भाव में तृतीयेश साहस, प्रयास और भाई-बहन के स्वामी को स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण के भाव में ले आता है। स्वयं के लिए साहस और पहल व्यक्तित्व को आकार देते हैं: अपने बल पर बना, भक्तिभाव वाला और साहसी व्यक्ति, जिसकी बुद्धि पढ़ाई से अधिक अनुभव से आती है। यह स्थिति कैसे काम करती है, यह इस पर निर्भर है कि आपके तृतीय भाव का स्वामी कौन-सा ग्रह है और वह कितना बलवान है।

  • 100% मुफ़्त
  • साइन-अप नहीं
  • आपकी अपनी कुंडली से
  • कला-विकला तक सटीकहर ग्रह ठीक कला तक
  • लाहिरी अयनांशभारतीय पंचांग का मानक
  • निजता पहले सेजब तक आप सहेजें नहीं, कुछ संग्रहित नहीं होता

यहाँ से शुरू करें, यह मुफ़्त है

अपनी कुंडली में देखें: प्रथम भाव में तृतीयेश

हर भाव की राशि लग्न से तय होती है, इसलिए जन्म का समय भी उतना ही मायने रखता है जितनी तारीख़।

जन्म का समय नहीं पता?निरयन · लाहिरी
  • मुफ़्त
  • निजी
  • तुरंत परिणाम
आपको क्या मिलता है

प्रथम भाव में तृतीयेश की जाँच क्या दिखाती है

आपकी कुंडली में ग्रह कहाँ बैठा है, कितना बलवान है, और आपकी वास्तविक स्थिति का विवेचन।

  • आपकी स्थितिआपकी कुंडली में भाव, राशि और गरिमा।
  • यह किस ओर संकेत करती हैआपकी वास्तविक स्थिति का विवेचन।
  • यह कब सक्रिय होती हैवे दशाएँ जो इसे सामने लाती हैं।
  • वहाँ बैठे दूसरे ग्रहउस भाव में और क्या बैठा है, हर एक के लिंक के साथ।
यह कैसे काम करता है

प्रथम भाव में तृतीयेश कैसे जाँचें

तीन चरण और कुछ सेकंड। न कुछ इंस्टॉल करना है, न फ़ोन नंबर या खाते की ज़रूरत है।

  1. अपनी जन्म तिथि और समय डालें

    जन्म प्रमाणपत्र पर लिखा स्थानीय समय डालें। यहाँ कई उत्तर घंटे पर और कुछ मिनट पर भी निर्भर करते हैं।

  2. अपना जन्म स्थान चुनें

    सूची से शहर चुनें। उसी से अक्षांश और वह समय क्षेत्र तय होता है जिसमें आपका जन्म समय पढ़ा जाता है।

  3. परिणाम पढ़ें

    आपकी स्थिति और उसका विवेचन, कारण के साथ।

प्रथम भाव में तृतीयेश मार्गदर्शिका

प्रथम भाव में तृतीयेश: विस्तार से

लोग जो प्रश्न पूछते हैं, उनके छोटे उत्तर, हर एक के पीछे का तर्क साथ में।

प्रथम भाव में तृतीयेश का क्या अर्थ है?

तृतीय भाव का स्वामी साहस, प्रयास, पहल, भाई-बहन, हाथ और शब्दों के कौशल, और छोटी यात्राओं का कारक है। उसकी स्थिति दिखाती है कि व्यक्ति अपना उत्साह और उद्यम कहाँ लगाता है। प्रथम भाव, यानी लग्न, स्वयं का भाव है: शरीर, स्वभाव, जीवन-शक्ति और जीवन की दिशा। यह केंद्र (स्तंभ भाव) भी है और त्रिकोण (भाग्य भाव) भी, जो इसे कुंडली का सबसे महत्वपूर्ण भाव बनाता है। प्रथम भाव में तृतीयेश होने से दोनों भाव जुड़ जाते हैं: तृतीय भाव के विषय (साहस, प्रयास और भाई-बहन) प्रथम भाव (स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण) में आ जाते हैं।

स्वयं और स्वभाव के लिए प्रथम भाव में तृतीयेश को कैसे पढ़ा जाता है?

स्वयं के लिए साहस और पहल व्यक्तित्व को आकार देते हैं: अपने बल पर बना, भक्तिभाव वाला और साहसी व्यक्ति, जिसकी बुद्धि पढ़ाई से अधिक अनुभव से आती है। शास्त्र इसे तृतीयेश की अनुकूल स्थितियों में गिनते हैं, और मानते हैं कि तृतीय भाव के विषय (साहस, प्रयास और भाई-बहन) स्वयं में एक निजी अभिव्यक्ति पाते हैं। बलवान स्वामी को इस स्थिति का सबसे अच्छा फल पाने वाला माना जाता है; निर्बल, अस्त या नीच स्वामी को इसका कम फल देने वाला।

लग्न प्रथम भाव में तृतीयेश को कैसे बदलता है?

तृतीयेश कौन-सा ग्रह है, यह लग्न पर निर्भर है, और प्रथम भाव में बैठने पर वह किस राशि में होगा, यह भी। भाव लग्न से पूर्ण राशि भाव पद्धति (whole-sign) से गिने जाते हैं (प्लेसिडस या भाव चलित जैसी भाव-संधि पर आधारित पद्धति राशि की सीमा के पास बैठे ग्रह को अगले भाव में ले जा सकती है)। गरिमा के हिसाब से यह स्थिति इन लग्नों के लिए सबसे बलवान है: वृषभ लग्न (चंद्र वृषभ राशि में), मीन लग्न (शुक्र मीन राशि में)। सबसे निर्बल यह इन लग्नों के लिए है: मकर लग्न (गुरु मकर राशि में नीच), यदि नीच भंग न हो। भूमिका वाला स्तंभ पाराशरी पद्धति में उस लग्न के लिए ग्रह की समग्र भूमिका बताता है।

लग्नतृतीयेशकिस राशि मेंगरिमाभूमिका
मेषबुधमेषसम राशिकठिन
वृषभचंद्रवृषभउच्च (सबसे बलवान)कठिन
मिथुनसूर्यमिथुनसम राशिकठिन
कर्कबुधकर्कशत्रु राशिकठिन
सिंहशुक्रसिंहशत्रु राशिकठिन
कन्यामंगलकन्याशत्रु राशिकठिन
तुलागुरुतुलाशत्रु राशिकठिन
वृश्चिकशनिवृश्चिकशत्रु राशिकठिन
धनुशनिधनुसम राशिकठिन
मकरगुरुमकरनीच (सबसे निर्बल)कठिन
कुंभमंगलकुंभसम राशिकठिन
मीनशुक्रमीनउच्च (सबसे बलवान)कठिन

प्रथम भाव में तृतीयेश को क्या बलवान या निर्बल बनाता है?

यह स्थिति हर कुंडली में एक ही नाम रखती है, पर परंपरा इसके फल आपके तृतीय भाव के स्वामी ग्रह के बल से पढ़ती है। गरिमा सबसे पहले: स्वराशि या उच्च राशि में बैठा ग्रह अपने फल अधिक पूरे देता है, और नीच राशि में बैठा ग्रह कम। साथ और दृष्टि इसके बाद: गुरु की दृष्टि को रक्षक माना जाता है, और साथ बैठे कठोर ग्रह को घर्षण बढ़ाने वाला। सूर्य से निकटता (अस्त होना) ग्रह को निर्बल करती है। और प्रथम भाव को स्वयं समग्र रूप से पढ़ा जाता है, जिसमें उसमें बैठे हर ग्रह और उसके अपने स्वामी की स्थिति को साथ तौला जाता है।

D9 से प्रथम भाव में तृतीयेश की पुष्टि कैसे होती है?

पाराशरी पद्धति जन्म कुंडली की किसी स्थिति को उसके विषय की वर्ग कुंडली में जाँचती है: प्रथम भाव के लिए यह नवांश (D9) है, जो भीतरी बल और जन्म कुंडली की हर स्थिति की पुष्टि के लिए देखा जाता है। यदि आपके तृतीय भाव का स्वामी ग्रह वहाँ अपनी स्वराशि या उच्च राशि में है, तो परंपरा इस स्थिति को पुष्ट मानती है; यदि वह अपनी नीच राशि में है, तो रुका हुआ। वर्ग कुंडली राशिचक्र के हर 3 अंश 20 कला पर राशि बदलती है, इसलिए यह जन्म समय के प्रति संवेदनशील है, और मिनट तक सही समय से यह जाँच भरोसेमंद होती है। कुंडली विवेचन आपकी कुंडली के लिए यह जाँच करता है।

प्रथम भाव में तृतीयेश कब सक्रिय होता है?

परंपरा किसी स्थिति को जीवन भर की मानती है, पर उसमें शामिल ग्रह की दशाओं में सबसे अधिक सक्रिय। विंशोत्तरी दशा पद्धति में आपके तृतीय भाव के स्वामी ग्रह की महादशा और अंतर्दशाएँ (antardasha) वह समय हैं जब इस स्थिति के विषय सबसे अधिक दिखाई देते माने जाते हैं, साथ में उन ग्रहों की दशाएँ भी जिनकी इस पर दृष्टि है या जो इसके साथ बैठे हैं। दशा कैलकुलेटर आपके जन्म के लिए ये दशाएँ दिखाता है, और कुंडली की समयरेखा चल रही दशा का विवेचन करती है।

प्रथम भाव में तृतीयेश के साथ और किन बातों को देखा जाता है?

परंपरा किसी भाव को एक स्थिति से कभी नहीं पढ़ती। प्रथम भाव का स्वाभाविक कारक भी है, सूर्य, जो स्वयं और जीवन-शक्ति का स्वाभाविक कारक है, और भाव तब सुदृढ़ माना जाता है जब उसका स्वामी और उसके कारक दोनों बलवान हों। प्रथम भाव पर गुरु की दृष्टि को रक्षक माना जाता है, उसमें कोई भी ग्रह बैठा हो। इस शृंखला के दूसरे पृष्ठ प्रथम भाव में हर ग्रह और हर भाव-स्वामी पर हैं, और कुंडली विवेचन आपकी कुंडली के लिए इन सबको साथ तौलता है।

KP प्रथम भाव में तृतीयेश को कैसे पढ़ता है?

कृष्णमूर्ति पद्धति (KP) जन्म के क्षण से भावों को असमान रूप में बाँटती है और प्रथम भाव को उसके आरंभ-बिंदु के उप-स्वामी (sub-lord) से परखती है। स्वयं और स्वभाव के लिए KP प्रथम, पंचम और एकादश भाव से संबंध को सहायक मानता है, और षष्ठ, अष्टम और द्वादश से संबंध को विरोधी। KP में तृतीयेश का महत्व इन्हीं संबंधों से है: यदि वह प्रथम भाव का कार्येश (significator) है, तो उसकी दशाओं को इस भाव के विषयों को आगे लाने वाला माना जाता है। कुंडली पृष्ठ पर KP विवेचन आपकी कुंडली के लिए यह दिखाता है।

यह गणना कैसे होती है

लाहिरी (चित्रापक्ष) अयनांश के साथ निरयन राशियाँ और पूर्ण राशि भाव, कला-विकला की सटीकता तक। सूर्योदय और सूर्यास्त वही हैं जो पंचांग दिखाते हैं, यानी अपवर्तन सहित सूर्य का ऊपरी किनारा, ताकि दिन के मुहूर्त-काल उन कैलेंडरों से मेल खाएँ जिनसे आप इन्हें मिलाते हैं। हमारी विधि के बारे में और जानें।

सामान्य प्रश्न

प्रथम भाव में तृतीयेश: अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छोटे उत्तर, हर उत्तर अपने आप में पूरा।

सबसे जल्दी उत्तर आपका अपना है। इसमें कुछ विवरण और कुछ ही सेकंड लगते हैं।

मेरा तृतीयेश खोजें
प्रथम भाव में तृतीयेश का क्या अर्थ है?

इसका अर्थ है कि आपके तृतीय भाव (साहस, प्रयास और भाई-बहन का भाव) का स्वामी ग्रह आपके प्रथम भाव (स्वयं, शरीर और दृष्टिकोण का भाव) में बैठा है। परंपरा दोनों क्षेत्रों को जुड़ा हुआ मानती है, और ग्रह का बल तय करता है कि यह जुड़ाव कैसे काम करता है।

क्या प्रथम भाव में तृतीयेश शुभ है या अशुभ?

शास्त्र इसे कुल मिलाकर अनुकूल मानते हैं। अच्छी गरिमा वाला ग्रह, या जिस पर गुरु की दृष्टि हो, विवेचन को उसकी खूबियों की ओर झुकाता है; निर्बल या पीड़ित ग्रह दोनों भावों के विषयों में अधिक सावधानी माँगता है।

मेरे लग्न के लिए तृतीयेश कौन-सा ग्रह है?

यह लग्न पर निर्भर है: मेष लग्न के लिए यह बुध है, वृषभ लग्न के लिए चंद्र। इस पृष्ठ की तालिका सभी बारह लग्न दिखाती है, साथ में यह भी कि ग्रह प्रथम भाव में किस राशि में है और वहाँ उसकी गरिमा क्या है।

क्या प्रथम भाव में तृतीयेश और प्रथम भाव में तृतीय भाव का स्वामी एक ही बात है?

हाँ। तृतीयेश, तृतीय भाव का स्वामी और तृतीय भाव का अधिपति एक ही ग्रह है, इसलिए प्रथम भाव में तृतीयेश और प्रथम भाव में तृतीय भाव का स्वामी, दोनों एक ही स्थिति के नाम हैं।

स्वयं और स्वभाव के लिए प्रथम भाव में तृतीयेश का क्या अर्थ है?

स्वयं के लिए साहस और पहल व्यक्तित्व को आकार देते हैं: अपने बल पर बना, भक्तिभाव वाला और साहसी व्यक्ति, जिसकी बुद्धि पढ़ाई से अधिक अनुभव से आती है।

क्या प्रथम भाव में तृतीयेश हर कुंडली में एक जैसा काम करता है?

नहीं। आपके तृतीय भाव का स्वामी ग्रह लग्न के साथ बदलता है, और उसकी गरिमा, उसके साथ के ग्रह और उसका बल कुंडली के साथ बदलते हैं। इस पृष्ठ की तालिका और नीचे का फ़ॉर्म दिखाते हैं कि आपके अपने लग्न के लिए यह कैसे काम करता है।

क्या प्रथम भाव में तृतीयेश देखने के लिए जन्म समय चाहिए?

हाँ। लग्न ही तय करता है कि कौन-सी राशि आपका प्रथम भाव है और हर भाव का स्वामी कौन-सा ग्रह है, और लग्न लगभग हर दो घंटे में बदल जाता है, इसलिए जन्म समय चाहिए। वर्ग कुंडली की जाँच के लिए समय कुछ मिनटों तक सही होना चाहिए।

अपनी कुंडली में प्रथम भाव में तृतीयेश कैसे देखें?

अपना तृतीय भाव जानने के लिए लग्न को पहली राशि मानकर 3 राशियाँ गिनें; उस राशि का स्वामी ग्रह आपका तृतीयेश है। इस पृष्ठ का फ़ॉर्म यह गिनती करके दिखाता है कि वह ग्रह कहाँ बैठा है।

मुफ़्त खाता

अपने परिवार की कुंडलियाँ एक जगह सहेजें

हर जन्म विवरण एक बार सहेजें। फिर हर कैलकुलेटर आपके, आपके माता-पिता, जीवनसाथी और बच्चों के लिए पहले से गणना करके खुलता है।

  • पूरे परिवार के जन्म विवरण सहेजें
  • हर टूल पहले से गणना करके खुलता है
  • मुफ़्त, और भुगतान की कोई जानकारी नहीं चाहिए

नवग्रह · नौ ग्रह

आपकी रिपोर्ट तैयार हो रही है

आपके विवरण के लिए एक पल। एक नई दृष्टि आपकी प्रतीक्षा में है।